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Thursday, January 16, 2014

अरविंद केजरीवाल: पुस्तक,पुरस्कार

पुस्तक
·         सूचना का अधिकार: व्यवहारिक मार्गदर्शिका( सह लेखक  विष्णु राजगडिया) वर्ष 2007 में प्रकाशित।
·         स्वराज 
·         जन लोकपाल विधेयक आंदोलन 2011

पुरस्कार
. 2004अशोक फैलो, सिविक अंगेजमेंट
·         2005'सत्येन्द्र दुबे मेमोरियल अवार्ड', आईआईटी कानपुर, सरकार पारदर्शिता में लाने के लिए उनके अभियान के लिए 
·         2006: उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए रमन मैगसेसे अवार्ड
·         2006: लोक सेवा में सीएनएन आईबीएन, 'इन्डियन ऑफ़ द इयर'
·         2009: विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार, उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए आईआईटी खड़गपुर।
·         2013 अमेरिकी पत्रिका 'फॉरेन पॉलिसी' द्वारा 2013 के 100 'सर्वोच्च वैश्विक चिन्तक' में शामिल।
(इस सूची में उन लोगों को शामिल किया गया है, जिन्होंने दुनिया में 'विशेष अंतर' लाने में योगदान दिया और 'असंभव की सीमा को पीछे धकेल दिया)

राजनीति में पदार्पण

राजनीति में पदार्पण

2 अक्टूबर 2012 को गांधीजी और शास्त्रीजी के चित्रों से सजी पृष्ठभूमि वाले मंच से अरविंद केजरीवाल ने अपने राजनीतिक सफर की औपचारिक शुरुआत कर दी। उन्होंने बाकायदा गांधी टोपी, जो अब "अण्णा टोपी" भी कहलाने लगी है, पहनी थी। वो शायद वही नारा लिखना पसंद करते जो पूरे "अन्ना आंदोलन" के दौरान टोपियों पर दिखाई देता रहा, "मैं अन्ना हजारे हूँ।" लेकिन उन्हें अन्ना के नाम और तस्वीर के इस्तेमाल की इजाज़त नहीं है। इसलिए उन्होंने लिखवाया, "मैं आम आदमी हूं।" उन्होंने 2 अक्टूबर 2012 को ही अपने भावी राजनीतिक दल का दृष्टिकोण पत्र भी जारी किया।
आम आदमी पार्टी का गठन
आम आदमी पार्टी के गठन की आधिकारिक घोषणा अरविंद केजरीवाल एवं लोकपाल आंदोलन के बहुत से सहयोगियों द्वारा 26 नवम्बर 2012, भारतीय संविधान अधिनियम की 63 वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिल्ली स्थित स्थानीय जंतर मंतर पर की गई।


2013 के दिल्ली विधान सभा चुनाव में बड़ी सफलता
2013 के दिल्ली विधान सभा चुनावों मे अरविंद केजरीवाल ने नई दिल्ली सीट से चुनाव लड़ा जहां उनकी सीधी टक्कर लगातार 15 साल से दिल्ली की मुख्यमंत्री रही श्रीमति शीला दीक्षित से थी। उन्होंने नई दिल्ली विधानसभा सीट से तीन बार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को 25864 मतों से हराया। अरविंद केजरीवाल को कुल 44269 मत प्राप्त हुये जबकि उनके मुक़ाबले शीला दीक्षित को केवल 18405 मत प्राप्त हुये।
नौकरशाह से सामाजिक कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता से राजनीतिज्ञ बने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की राजनीति में धमाकेदार प्रवेश किया है।आम आदमी पार्टी ने 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा चुनाव में 28 सीटें जीतकर प्रदेश की राजनीति में खलबली मचा दी। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी भारतीय जनता पार्टीके बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। सत्तारूढ़ काँग्रेस पार्टी तीसरे स्थान पर खिसक गयी।

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने केजरीवाल की धमक को स्वीकार किया। हालाकि दिल्ली की पूर्व   मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का चुनाव के पहले कहना था कि वह केजरीवाल की परवाह भी नहीं करतीं, शीला दीक्षित ने कहा था कि "वह(आम आदमी पार्टी) तो हमारे रडार पर भी नहीं हैं."
विधानसभा चुनावों में पार्टी की बड़ी हार से शीला दीक्षिता ने अपनी ही पार्टी को दोषी ठहराया है। शीला दीक्षित ने कहा पार्टी कि ओर से मूझे पूरा सहयोग नहीं मिला। शीला दीक्षित ने कहा कि अरविंद केजरीवाल मुझसे ज्यादा तेज हैं।

 आम आदमी पार्टी की 28 सीटों की जीत विरोधी दलों के अलावा खुद केजरीवाल और उनकी पार्टी के अनुमान से कही ज्यादा रही।
राजनीतिक दल बनाने की विधिवत घोषणा के दौरान केजरीवाल ने कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वढेरा और बिल्डर्स डीएलएफ के बीच हुए भ्रष्टाचार का खुलासा किया है और बाद में केन्द्रीय विधि मंत्री सलमान खुर्शीद और उनकी पत्नी लुई खुर्शीद के ट्रस्ट में हो रही धांधलियों के खिलाफ आन्दोलन भी छेड़ा।
अपनी नई तरकीबों की वजह से 44 साल के केजरीवाल के राजनीतिक दुश्मन भी पैदा हुए हैं. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ मुहिम चलाई, जिससे तमतमाए वाड्रा ने आम आदमी पार्टी (आप) के खिलाफ मशहूर बयान दे दिया, "ये बनाना रिपब्लिक की मैंगो (आम) पार्टी है."




अन्ना और केजरीवाल


अन्ना और केजरीवाल


भले ही अरविंद केजरीवाल ने तमाम सामाजिक काम किए हो पर देशवासियों का केजरीवाल से परिचय अन्ना के आंदोलन से ही हुआ।
रामलीला मैदान में हुए आंदोलन को टीम अन्ना का आंदोलन कहा गया।अन्ना के सबसे करीबी शख्स के रुप में केजरीवाल को पहचान मिली ।
आम पार्टी के गठन के दौरान से अन्ना और केजरीवाल के बीच दूरियां नजर आने लगी।
 अन्ना और केजरीवाल के रिश्तों में दरार आई दरार की वजह कुछ भी हो लेकिन रामलीला मैदान आंदोलन की ओर पूरे देश की नजरें खीचनें वाली टीम के दो धड़े टीम अन्ना और टीम केजरीवाल के रुप मे जाने जाते है। लेकिन केजरीवाल अभी भी अन्ना को अपना गुरु बताते हैं। उनका कहना है कि वह मजबूर होकर राजनीति में आए, उन्हे राजनीति में आना पड़ा क्योंकि एक भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम चल रही थी और सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत कानून लाने की बात कही, पर बाद में सरकार वादे से मुकर गई।

अरविंद केजरीवाल: एक इंजीनियर से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफर



अरविंद केजरीवाल: एक इंजीनियर से लेकर मुख्यमंत्री तक का सफर

पैंट के साथ बाहर करके पहनी गई आधी बाजू की ढीली ढाली शर्ट, काली मूंछों वाला एक नाटे कद का साधारण सा दिखने वाला आदमी। जो कभी ट्रेन का इंतजार करता प्लेटफॉर्म पर जमीन पर सोते नजर आता, तो कभी ऑटो के लिए सड़क पर इंतजार करता। पैंतालीस वर्षीय अरविंद केजरीवाल की साल भर पहले भीड़ में कोई पहचान नहीं थी।
 आज की तारीख में हर किसी को अरविंद केजरीवाल की सफलता प्रजातंत्र में एक ऐसी नई तस्वीर नजर आती है जो किसी चमत्कार से कम नही है। ऐसा शायद लोगो ने फिल्मी कथाओं मे ही देखा था। एक शख्स राजनीतिक जगत में सिर्फ सवा साल में फर्श से अर्श पर पहुंच कर अपनी कहानी बयां कर रहा है। वैसे कई ऐसे लोग हैं जो सबकुछ गंवाने के बाद लोकतंत्र के सबसे छोटे निकाय का भी चुनाव नहीं जीत सके लेकिन केजरीवाल ने चंद दिनों में जनता की नब्ज टटोलकर देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सत्ता पर कब्जा कर लिया. घपले और घोटालों के दौर में नाटे कद का यह केजरीवाल दिल्ली का 7वां मुख्यमंत्री बन गया।


जो कभी इनकम टैक्स विभाग में अधिकारी हुआ करता था, साधारण सी कद काठी वाला यह शख्स कब दिल्ली की सबसे ताकतवर कुर्सी का ओहदेदार बन गया साधारण सा दिखने वाला आदमी आज युवाओं का महानायक बन चुका है।

 हरियाणा के भिवानी जिले के सीवानी मंडी में 16 अगस्त 1968 को गोविंद राम केजरीवाल और गीता देवी के घर जन्माष्टमी के दिन अरविंद का जन्म हुआ और इसीलिए घर वाले प्यार से उन्हें किशन भी बुलाते हैं। हिसार से ही अरविंद ने अपनी हाईस्कूल तक की पढाई पूरी की। उन्होंने
उन्होंने 1989 में आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीई किया। अरविंद केजरीवाल एक बार कोलकाता गए थे। वहां उनकी मुलाकात मदर टेरेसा से हुई। अरविंद ने कालीघाट पर काम किया और शायद यहीं से उन्हें दूसरों के लिए जीने का नजरिया मिला। 1995 में अरविंद इंडियन रेवेन्यू सर्विस के लिये चुने गये थे.
 ट्रेनिंग के बाद दिल्ली में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में अस्सिटेंट कमिश्नर बने। लेकिन यहां भी अपने लिये उन्होंने खुद नियम बनाये। वो नियम थे, अपनी टेबल को खुद साफ करना, डस्टबिन की गंदगी को खुद हटाना, किसी काम के लिये चपरासी का इस्तेमाल नहीं करना। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में नौकरी करते हुये ही केजरीवाल ने डिपार्टमेंट में भ्रष्टाचार कम करने की मुहिम शुरु कर दी थी। आईआरएस सेवा के प्रशिक्षण के दौरान ही केजरीवाल ने अपनी बैचमेट सुनीता से विवाह किया। केजरीवाल के एक पुत्र और एक पुत्री है।
साल 2000 में केजरीवाल ने परिवर्तन नाम के एक एनजीओ की शुरूआत की। बैनर पोस्टर छपवाये। जिन पर लिखा था रिश्वत मत दीजिये, काम न हो तो हमसे संपर्क कीजिये। परिवर्तन के जरिए उन्होंने देश भर में सूचना के अधिकार का अभियान शुरू किया, जो जल्दी ही एक मूक सामाजिक आन्दोलन बन गया, दिल्ली में सूचना अधिकार अधिनियम को 2001 में पारित किया गया। और अंत में राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संसद ने 2005 में सूचना अधिकार अधिनियम (आरटीआई) को पारित कर दिया।
 केजरीवाल ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सूचना का अधिकार देने का कानून बनवाया। वे एक एनजीओ 'साथी' से भी जुड़े। केजरीवाल ने पब्लिक कॉज रिसर्च फाउंडेशन नाम का एक गैर-सरकारी संगठन भी बनाया। उन्होंने जन लोकपाल बिल के लिए अन्ना हजारे के साथ मिलकर अनशन किया और धरनों, प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। बिल बेशक केंद्र सरकार ने पारित किया हो, लेकिन जनता के बीच जाकर उन्हें जागृत करने का जिम्मा अरविंद और उनके परिवर्तन ने उठाया।
अरविंद को राइट टू इन्फॉरमेशन पर काम के लिये एशिया का नोबल पुरस्कार कहा जाने वाला मैग्सेसे अवार्ड मिला। परिवर्तन की लड़ाई का ही अगला चरण था जनलोकपाल। यह सिलसिला बढता गया और केजरीवाल ने फरवरी 2006 में नौकरी से इस्तीफा दे दिया और पूरे समय के लिए सिर्फ परिवर्तन में ही काम करने लगे।
इसके बाद देश में शुरू हुआ भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ा आंदोलन। राम लीला मैदान मे अन्ना हजारे के सबसे करीबी शख्स के रुप में अरविंद केजरीवाल को पूरे देश में पहचान मिली।आंदोलन को जनसमर्थन तो पूरा मिला लेकिन जनलोकपाल बिल नहीं बन पाया।
इसके बाद केजरीवाल ने राजनीति में आने का फैसला किया। मगर यहीं से अन्ना हजारे और केजरीवाल के रास्ते अलग हो गए।
कुछ साथियों को पीछे छोड़ कुछ को साथ लेकर केजरीवाल अन्ना के बिना भी आगे बढ़ते गए। गांधी जयंती 2 अक्टूबर 2012 को केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी बनाने की घोषणा की।
26 नवंबर 2012 में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी अस्तित्व में आई। महज एक साल पहले पैदा हुई आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में काबिज कांग्रेस और भाजपा को कडी टक्कर दी। विधानसभा चुनाव में उन्होंने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। उन्होंने नई दिल्ली विधानसभा सीट से तीन वार जीत चुकी दिल्ली की मुख्यमंत्री को 25 हजार से अधिक मतों से पराजित किया और उनकी पार्टी ने 70 सदस्यीय विधानसभा में 28 सीटें हासिल की।
बीजेपी के बाद दूसरी बड़ी पार्टी के रुप मे उभरी आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली राज्य मे सरकार बनाई जिसमे अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने। 28 दिसंबर 2013 को रामलीला मैदान में शपथ ग्रहण कर उन्होंने यह पदभार संभाला।
राजीव श्रीवास्तव (एक टीवी चैनल के पत्रकार)










अरविंद केजरीवाल- एक नजर
नाम- अरविंद केजरीवाल
जन्म- 16 अगस्त 1968
जन्म स्थान- सिवानी मंडी जिला भिवानी(हरियाणा)
पिता- गोविंद रण केजरीवाल
माता- गीता देवी
पत्नी- सुनीता केजरीवाल
संतान- 2
पद- मुख्यमंत्री दिल्ली
शपथ ग्रहण- 28 दिसंबर 2013
पार्टी- आम आदमी पार्टी
शिक्षा- स्नातक मैकेनिकल इंजीनियरिंग
संस्थान- आई आई टी खडगपुर



Tuesday, June 12, 2012

When it comes to passing of MPs salary bill, it does not require any standing committee

Who says to by-pass the constitutional requirements ? Bring the Constitution to the aspirations of the people. It is not the question of only fast, it is the public ire which is giving him strength and making the champions of constitution, who break the constitution day in and day out for their own benefit, listen to the voice of the public.


When it comes to passing of MPs salary bill, it does not require any standing committee and there can be n number of instances. The purpose of standing committee is to have the views of all the stake holders on the proposed legislation. This lokpal bill has been in public domain and has been discussed so many times, then why there cannot be discussion directly in the parliament.

वो वतन बेचकर मुस्कुराते रहे

“दर्द होता रहा छटपटाते रहे, आईने॒से सदा चोट खाते रहे, वो वतन बेचकर मुस्कुराते रहे


हम वतन के लिए॒सिर कटाते रहे” For your education if you do not know this ---- See how Lokpal Bill can curb the politicians, Circulate it to create awareness Existing System System Proposed by civil society

No politician or senior officer ever goes to jail despite huge evidence because Anti Corruption Branch (ACB) and CBI directly come under the government. Before starting investigation or initiating prosecution in any case, they have to take permission from the same bosses, against whom the case has to be investigated. Lokpal at centre and Lokayukta at state level will be independent bodies. ACB and CBI will be merged into these bodies. They will have power to initiate investigations and prosecution against any officer or politician without needing anyoneⳠpermission. Investigation should be completed within 1 year and trial to get over in next 1 year. Within two years, the corrupt should go to jail.

No corrupt officer is dismissed from the job because Central Vigilance Commission, which is supposed to dismiss corrupt officers, is only an advisory body. Whenever it advises government to dismiss any senior corrupt officer, its advice is never implemented. Lokpal and Lokayukta will have complete powers to order dismissal of a corrupt officer. CVC and all departmental vigilance will be merged into Lokpal and state vigilance will be merged into Lokayukta.

No action is taken against corrupt judges because permission is required from the Chief Justice of India to even register an FIR against corrupt judges. Lokpal & Lokayukta shall have powers to investigate and prosecute any judge without needing anyoneⳠpermission.

Nowhere to go - People expose corruption but no action is taken on their complaints. Lokpal & Lokayukta will have to enquire into and hear every complaint.

There is so much corruption within CBI and vigilance departments. Their functioning is so secret that it encourages corruption within these agencies. All investigations in Lokpal & Lokayukta shall be transparent. After completion of investigation, all case records shall be open to public. Complaint against any staff of Lokpal & Lokayukta shall be enquired and punishment announced within two months.

Weak and corrupt people are appointed as heads of anti-corruption agencies. Politicians will have absolutely no say in selections of Chairperson and members of Lokpal & Lokayukta. Selections will take place through a transparent and public participatory process.

Citizens face harassment in government offices. Sometimes they are forced to pay bribes. One can only complaint to senior officers. No action is taken on complaints because senior officers also get their cut. Lokpal & Lokayukta will get public grievances resolved in time bound manner, impose a penalty of Rs 250 per day of delay to be deducted from the salary of guilty officer and award that amount as compensation to the aggrieved citizen.

Nothing in law to recover ill gotten wealth. A corrupt person can come out of jail and enjoy that money. Loss caused to the government due to corruption will be recovered from all accused.

Small punishment for corruption- Punishment for corruption is minimum 6 months and maximum 7 years. Enhanced punishment - The punishment would be minimum 5 years and maximum of life imprisonment.









280 लाख करोड़ का सवाल है ...

भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा"* ये कहना है स्विस बैंक के डाइरेक्टर का. स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280 लाख करोड़ रुपये उनके स्विस बैंक में जमा है. ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है.

या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते है. या यूँ भी कह सकते है कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4 लेन रोड बनाया जा सकता है. ऐसा भी कह सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है. ये रकम इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60 साल तक ख़त्म ना हो. यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं है. जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को



लूटा है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है.

इस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है. अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये लूटा. मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280 लाख करोड़ लूटा है. एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 280 लाख करोड़ है. यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़, या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है. भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है. सोचो की कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ है. हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार है.हाल ही में हुवे घोटालों का आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला, २ जी स्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला ... और ना जाने कौन कौन से घोटाले अभी उजागर होने वाले है ........आप लोग जोक्स फॉरवर्ड करते ही हो. इसे भी इतना फॉरवर्ड करो की पूरा भारत इसे पढ़े ... और एक आन्दोलन बन जाये Spread This Like WILDFIRE !!!

I have forwarded this to my entire Contact list in Bcc modeOur Nation needs us.... Please Contribute.... atleast by forwarding this....This is not just a forward, it is the Future of our Nation & YOURS







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"Indians r poor bt India is nt a poor country".

"Indians r poor bt India is nt a poor country".Says one of the swiss bank directors.He says tht "280 lac crore" of Indian money is depositd in swiss banks wich can be used for 'taxless' budget for 30 yrs.Can give 60 crore jobs to all Indians.Frm any village to Delhi 4 lane roads.4evr free power suply to more than 500 social projects.Evry citizen can get monthly 2000/- for 60 yrs. No need of World Bank & IMF loan. Think hw our money is blockd by rich politicians. We hav full right agnst corrupt politicians. Itna forward karo ki pura INDIA padhe.Take this seriously,u can forward jokes,then Y nt this? Be a responsible citizen....